भाषाविज्ञान बताता है कि पटना, पट्टन शब्द से बना है। पट्टन संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है शहर या नगर। इससे इसका व्यापारिक महत्त्व प्रकट होता है।
प्राचीन जमाने में यह एक गांव रहा होगा, जैसा कि 'पाटलिग्राम' शब्द से जाहिर है। कहा जाता है कि इस इलाके में 'पाटली' नामक वृक्ष की प्रधानता थी। 'पाटलिपुत्र' नाम के मूल में यह 'पाटली' वृक्ष रहा होगा। यहां सघन वन तथा पुष्प उद्यान होने के संकेत 'कुसुमपुर', (कुसुमपुर, कन्नौज का भी प्राचीन नाम रहा है। देखें, कृष्ण कांत दुवे, 'कन्नौजी लोक संस्कृति और लोकगीत', आजकल, अगस्त 2012) 'पुष्पपुर' आदि नामों से भी मिलते है। 'वायु पुराण' में हमें 'कुसुमपुर' नाम मिलता है जिसका शाब्दिक अर्थ है 'फूलों की नगरी'। (डी आर पाटिल, दी एन्टीक्वेरियन रिमेन्स इन बिहार, के पी जायसवाल, शोध संस्थान, 1963, पृष्ठ 373) 'गार्गी संहिता' में इसे पुष्पपुर के साथ 'कुसुम-ध्वज' भी कहा गया है। (स्मिथ, अर्ली हिस्ट्री ऑफ इंडिया, पृष्ठ 228 में उद्धृत) पटना का प्राचीन 'कुसुमपुर' नाम आज भी 'फुलवारी शरीफ' में सुरक्षित देखा जा सकता है। (डी आर पाटिल, पूर्वोद्धृत, पृष्ठ 373)
मध्यकाल में यह 'अजीमाबाद' के नाम से जाना गया। यह नाम शहर और सूबा दोनों के लिए प्रचलन में था। (द कॉम्प्रिहेंसिव हिस्ट्री ऑफ बिहार, वॉल्यूम ll, पार्ट ll, पृष्ठ 232, पादटिप्पणी संख्या 6) 1704 ईस्वी में औरंगजेब का पोता अजीम-उस-शान बिहार का सूबेदार था जिसने शहर को अपने तरीके से बसाया। लोदियों के मुहल्ले का नाम 'लोदीकटरा', मुगल सेना के अधिकारियों का मुहल्ला 'मुगलपुरा' और उलेमा, साहित्यकार, शायर, कवि का मुहल्ला 'मैदाने फसाहत' के नाम से बसा। (वही) सद्र-उस-सुदूर (मुख्य न्यायाधीश) का निवास स्थान 'सदर गली' कहलाया (जैसे आज चपरासी क्वार्टर और ऑफिसर्स फ्लैट हैं) तो हिन्दू उमरा (अधिकारी) के कारण 'दीवान मुहल्ला' आबाद हुआ। मुगल काल में पटना शहर की पूर्वी सीमा पर माल पर चुंगी (सलामी) वसूलने का केंद्र था, इसलिए यह मुहल्ला 'मालसलामी' कहलाया।
कुछ मोहल्लों का नाम पेशे के आधार पर मशहूर हुए। बर्तन बनानेवालों का मुहल्ला 'ठठेरी बाजार' तो तीर-कमान बनानेवालों का मुहल्ला 'कमानगर की गली' हुआ। आज इसे 'कमंगर गली' के नाम से जाना जाता है ठीक जैसे मैंगल तालाब अब मंगल तालाब है। पान बेचनेवालों का मुहल्ला 'पानदारी', नमक का बाजार 'नूनगोला', चावल का बाजार 'चौहट्टा' और गुड़ का बाजार 'गुड़हट्टा' या 'गुरहट्टा' और मछली बाजार 'मछरहट्टा'। कचौड़ी गली तथा कठौती गली इसी श्रेणी में शुमार हैं।
आधुनिक पटना में भी पेशे और सरकारी विभाग के नाम पर कुछ मुहल्ले है। सी डी ए कॉलोनी, सी आई डी कॉलोनी, रेवेन्यू कॉलोनी, पुलिस कॉलोनी आदि। पेशा के नाम पर हमें पत्रकारनगर जैसा मुहल्ला भी प्राप्त होता है। कुछ मुहल्लों के नाम जाति के नाम पर रखे जाने लगे हैं। ए जी कॉलोनी मुख्य सड़क के एक तरफ 'श्रीनगर' मुहल्ला है तो दूसरी तरफ 'केसरी' नगर। कहने को तो श्रीकृष्ण सिंह और कलक्टर सिंह केसरी दो महापुरुष के नाम हैं, लेकिन मूल में जाति है।
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