Sunday, July 11, 2010

केवल एयरसेल चोर नहीं है

दूरसंचार के क्षेत्र में निजी कंपनियों की बाढ़, गलाकाटू प्रतिस्पर्द्धा एवं सरकारी नियंत्रण व हस्तक्षेप की कमी की वजह से आम जन का जीवन काफी मुश्किल हो गया है। भोले ग्राहकों को लुभाने के लिए ये अपनी कॉल-दरें तो कम कर देते हैं लेकिन अन्य तरीकों से कई गुना अधिक कीमत वसूल ले जाते हैं। मेरे पास इसके कुछ स्पष्ट उदाहरण हैं। एयरसेल का एक नंबर है मेरे पास-8083076273। पिछले तीन माह से यह डायलर ट्यून के नाम पर मासिक 30 रुपये की दर से काट रहा है। गत तीसरे माह किसी महिला कर्मचारी का फोन आया कि ‘आपको हमारी कंपनी ने एक बेहतर उपभोक्ता के रूप में चुना है, अतएव डायलर ट्यून की सुविधा मुहैया करायी जा रही है।’ मैं कुछ कहता इससे पहले धन्यवाद के साथ उसने फोन डिसकनेक्ट कर दिया। दो दिन बाद पता चला कि उसके एवज में तीस रुपये काट लिये गये हैं। कंपनी को मैंने अपना विरोध दर्ज जताया तो कहा कि ‘अच्छी चीज है, चलने दीजिए।’ मैंने इस सुविधा को तत्काल प्रभाव से बंद करने की हिदायत दी लेकिन वह रट लगाता रहा कि ‘यह सुविधा आपकी मांग पर आपको प्रदान की जा रही है।’ जब मैंने ‘अपनी मांग’ की ‘प्रामाणिकता’ (सबूत) की मांग की तो ऐसा कुछ भी उपलब्ध कराने से इनकार कर गया। आज तीसरा माह है जब फिर से उसने अपनी ‘लीला’ दुहरा दी। 8. 21 बजे सुबह एक मेसेज आया कि ‘डियर सब्स्क्राइबर, यू हैव बीन चार्ज्ड रूपीज थर्टी फॉर थर्टी डेज ऑफ सब्सक्रिप्शन फॉर डायलर ट्यून्स। एनी टाइम कॉल 53000 फॉर लेटेस्ट डायलर ट्यून्स।’ और मैंने पाया कि पुनः मेरे खाते से गाढ़ी कमाई के 30 रुपये कंपनी की जेब में चले गये। ग्राहकों को लूटने का इससे नायाब तरीका और क्या हो सकता है। बाजारवाद की यही नंगई है। ये और बात है कि एयरसेल अकेला चोर नहीं है। इसकी कथा से दूसरे का भी हाल जानें।

3 comments:

Jandunia said...

शानदार पोस्ट

माधव said...

bad experience

Dr Om Prakash Pandey said...

Mr Raju Ranjan is right .I use a reliance mobile and I have also felt somewhat similar problem .Government should take steps to safeguard the consumers in an efficient way . But, my worst experience of having a telephone has been with BSNL . Fie upon such tendencies !